Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.27: सावित्री बोली, "हे प्रभु! मेरे ससुर को राज्य से निकाल दिया गया है और वे वन में रहते हैं। उनकी आँखों की रोशनी भी चली गई है। मैं चाहती हूँ कि आपकी कृपा से महाराज की आँखों की रोशनी वापस आ जाए और वे अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी और तेजस्वी हो जाएँ।" | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सावित्री बोली, "हे प्रभु! मेरे ससुर को राज्य से निकाल दिया गया है और वे वन में रहते हैं। उनकी आँखों की रोशनी भी चली गई है। मैं चाहती हूँ कि आपकी कृपा से महाराज की आँखों की रोशनी वापस आ जाए और वे अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी और तेजस्वी हो जाएँ।"
Savitri said, "O Lord! My father-in-law has been ousted from his kingdom and lives in the forest. He has also lost his eyesight. I wish that by your grace, that Maharaja may get his eyesight back and may he become strong and radiant like the fire and the sun." 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥