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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.297.20 
यम उवाच
निवर्त गच्छ सावित्रि कुरुष्वास्यौर्ध्वदेहिकम्।
कृतं भर्तुस्त्वयाऽऽनृण्यं यावद् गम्यं गतं त्वया॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यमराज बोले - सावित्री! अब तुम वापस जाओ और सत्यवान का अंतिम संस्कार करो। अब तुम अपने पति के ऋण से मुक्त हो गई हो। तुमने अपने पति का जहाँ तक पालन करना चाहिए था, कर लिया है।
 
Yamraj said - Savitri! Now you go back and perform the last rites of Satyavan. Now you are free from the debt of your husband. You have followed your husband as far as you should have.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)