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mahabharat 3.297.2-3h: लकड़ी काटते समय परिश्रम के कारण उसके शरीर से पसीना निकलने लगा और उसी परिश्रम के कारण उसके सिर में दर्द होने लगा। तब वह थककर अपनी प्रिय पत्नी के पास गया और बोला -॥2 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  3.297.2-3h 
तस्य पाटयत: काष्ठं स्वेदो वै समजायत।
व्यायामेन च तेनास्य जज्ञे शिरसि वेदना॥ २॥
सोऽभिगम्य प्रियां भार्यामुवाच श्रमपीडित:।
 
 
अनुवाद
लकड़ी काटते समय परिश्रम के कारण उसके शरीर से पसीना निकलने लगा और उसी परिश्रम के कारण उसके सिर में दर्द होने लगा। तब वह थककर अपनी प्रिय पत्नी के पास गया और बोला -॥2 1/2॥
 
While chopping wood, sweat started coming out of his body due to the exertion and due to the same exertion, he started having a headache. Then, tired and exhausted, he went to his beloved wife and said -॥2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)