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mahabharat 3.297.18: फिर प्राण निकल जाने पर उसकी श्वास रुक गई, शरीर की कान्ति चली गई और शरीर प्राणहीन होकर कुरूप हो गया ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.297.18 
तत: समुद्‍धृतप्राणं गतश्वासं हतप्रभम्।
निर्विचेष्टं शरीरं तद् बभूवाप्रियदर्शनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
फिर प्राण निकल जाने पर उसकी श्वास रुक गई, शरीर की कान्ति चली गई और शरीर प्राणहीन होकर कुरूप हो गया ॥18॥
 
Then, as the soul departed, his breathing stopped, his body lost its glow and his body became lifeless and appeared ugly. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)