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mahabharat 3.297.17: तत्पश्चात् यमराज ने उस असहाय प्राणी को, जो अंगूठे के बराबर का था और पाश में बंधा हुआ था, बलपूर्वक सत्यवान के शरीर से बाहर खींच लिया॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.297.17 
तत: सत्यवत: कायात् पाशबद्धं वशं गतम्।
अङ्गुष्ठमात्रं पुरुषं निश्चकर्ष यमो बलात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् यमराज ने उस असहाय प्राणी को, जो अंगूठे के बराबर का था और पाश में बंधा हुआ था, बलपूर्वक सत्यवान के शरीर से बाहर खींच लिया॥17॥
 
Thereafter, Yamraj forcefully pulled out the helpless creature, which was only a thumb in size and was tied in a noose, from Satyavan's body. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)