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mahabharat 3.297.16: वह सत्यवादी, गुणवान, सुन्दर और गुणों का सागर है। वह मेरे दूतों के द्वारा ले जाने योग्य नहीं है। इसलिए मैं स्वयं आया हूँ।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.297.16 
अयं च धर्मसंयुक्तो रूपवान् गुणसागर:।
नार्हो मत्पुरुषैर्नेतुमतोऽस्मि स्वयमागत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह सत्यवादी, गुणवान, सुन्दर और गुणों का सागर है। वह मेरे दूतों के द्वारा ले जाने योग्य नहीं है। इसलिए मैं स्वयं आया हूँ।॥16॥
 
He is truthful, virtuous, beautiful and an ocean of virtues. He is not fit to be taken by my messengers. That is why I have come myself.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)