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mahabharat 3.297.12: यमराज बोले- सावित्री! तुम पतिव्रता स्त्री और तपस्वी हो, इसीलिए मैं तुमसे बात कर सकता हूँ। शुभ! मुझे यमराज समझो।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.297.12 
यम उवाच
पतिव्रतासि सावित्रि तथैव च तपोऽन्विता।
अतस्त्वामभिभाषामि विद्धि मां त्वं शुभे यमम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यमराज बोले- सावित्री! तुम पतिव्रता स्त्री और तपस्वी हो, इसीलिए मैं तुमसे बात कर सकता हूँ। शुभ! मुझे यमराज समझो।
 
Yamraj said- Savitri! You are a devoted wife and an ascetic, that is why I can talk to you. Shubh! Consider me as Yamraj.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)