Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.108: उस समय सत्यवान ने कहा - हे भयंकर! यहाँ बार-बार आने के कारण सभी रास्ते मुझे परिचित लग रहे हैं। वृक्षों के बीच से दिखाई देने वाली चाँदनी से भी मैं रास्ते पहचान सकता हूँ। | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय सत्यवान ने कहा - हे भयंकर! यहाँ बार-बार आने के कारण सभी रास्ते मुझे परिचित लग रहे हैं। वृक्षों के बीच से दिखाई देने वाली चाँदनी से भी मैं रास्ते पहचान सकता हूँ।
At that time Satyavan said - O fearful one! All the paths here are familiar to me due to frequent visits. I can recognize the paths even from the moonlight visible through the trees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥