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mahabharat 3.297.106: फिर उसने टोकरी का बोझ एक पेड़ की शाखा से लटका दिया और कुल्हाड़ी लेकर अपने पति के पास लौट आई।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  3.297.106 
कृत्वा कठिनभारं सा वृक्षशाखावलम्बिनम्।
गृहीत्वा परशुं भर्तु: सकाशे पुनरागमत्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने टोकरी का बोझ एक पेड़ की शाखा से लटका दिया और कुल्हाड़ी लेकर अपने पति के पास लौट आई।
 
Then she hung the basket's load from a branch of a tree and took the axe and returned to her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)