Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.297.105: तब सावित्री ने उससे कहा - 'कल प्रातःकाल तुम फल ले जाना। उस समय तुम्हारे कल्याण के लिए मैं यह कुल्हाड़ी अपने साथ ले जाऊँगी।'॥105॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.297.105 
तमुवाचाथ सावित्री श्व: फलानि हरिष्यसि।
योगक्षेमार्थमेतं ते नेष्यामि परशुं त्वहम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
तब सावित्री ने उससे कहा - 'कल प्रातःकाल तुम फल ले जाना। उस समय तुम्हारे कल्याण के लिए मैं यह कुल्हाड़ी अपने साथ ले जाऊँगी।'॥105॥
 
Then Savitri said to him, 'Take the fruits tomorrow morning. At that time, for your well-being, I will take this axe with me.'॥105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)