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mahabharat 3.297.104: सत्यवान ने भी उठकर एक हाथ से अपना शरीर पोंछा और इधर-उधर देखकर फलों की टोकरी की ओर देखा।।104।।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  3.297.104 
उत्थाय सत्यवांश्चापि प्रमृज्याङ्गानि पाणिना।
सर्वा दिश: समालोक्य कठिने दृष्टिमादधे॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान ने भी उठकर एक हाथ से अपना शरीर पोंछा और इधर-उधर देखकर फलों की टोकरी की ओर देखा।।104।।
 
Satyavan also got up and wiped his body with one hand and after looking around, he looked at the basket of fruits. 104.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)