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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.297.103 
मार्कण्डेय उवाच
सावित्री तत उत्थाय केशान् संयम्य भाविनी।
पतिमुत्थापयामास बाहुभ्यां परिगृह्य वै॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं - युधिष्ठिर! तब सावित्री अपने पति का कुशल-क्षेम सोचती हुई उठी और अपने खुले केशों को बाँधकर दोनों हाथों से अपने पति को पकड़कर ऊपर उठा लिया।
 
Markandeya says - Yudhishthira! Then Savitri, thinking about her husband's well-being, got up and tied up her loose hair and held her husband with both hands and raised him up.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)