Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.102: यदि तुम्हारा मन धर्म में लगा हुआ है, यदि तुम मुझे जीवित देखना चाहते हो अथवा मुझसे प्रेम करना अपना कर्तव्य समझते हो, तो हम दोनों शीघ्र ही आश्रम के निकट चलें ॥102॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि धर्मे च ते बुद्धिर्मां चेज्जीवन्तमिच्छसि।
मम प्रियं वा कर्तव्यं गच्छावाश्रममन्तिकात्॥ १०२॥
अनुवाद
यदि तुम्हारा मन धर्म में लगा हुआ है, यदि तुम मुझे जीवित देखना चाहते हो अथवा मुझसे प्रेम करना अपना कर्तव्य समझते हो, तो हम दोनों शीघ्र ही आश्रम के निकट चलें ॥102॥
If your mind is devoted to Dharma, if you wish to see me alive or if you think it your duty to love me, then let us both quickly go near the Ashrama. ॥102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥