Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.101: वररोहे! मैं सत्य की शपथ लेकर अपने शरीर का स्पर्श करके कहता हूँ कि यदि मैं अपनी माता या पिता को अप्रिय वस्तु देखूँगा तो जीवित नहीं रहूँगा॥101॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा मातु: पितुर्वापि यदि पश्यामि विप्रियम्।
न जीविष्ये वरारोहे सत्येनात्मानमालभे॥ १०१॥
अनुवाद
वररोहे! मैं सत्य की शपथ लेकर अपने शरीर का स्पर्श करके कहता हूँ कि यदि मैं अपनी माता या पिता को अप्रिय वस्तु देखूँगा तो जीवित नहीं रहूँगा॥101॥
Vararohe! I swear by the truth and by touching my own body I say that if I see anything displeasing to my mother or father then I shall not survive.॥ 101॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥