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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 100-d2h
 
 
श्लोक  3.297.100-d2h 
सत्यवानुवाच
कामये दर्शनं पित्रोर्याहि सावित्रि मा चिरम्॥ १००॥
(अपि नाम गुरू तौ हि पश्येयं प्रीयमाणकौ।)
 
 
अनुवाद
सत्यवान बोले- सावित्री! आओ, मैं शीघ्र ही अपने माता-पिता से मिलना चाहता हूँ। क्या मैं उन दोनों को सुखी देख सकूँगा?॥100॥
 
Satyavan said- Savitri! Come, I want to meet my parents soon. Will I be able to see them both happy?॥100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)