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mahabharat 3.296.9: हे भरतश्रेष्ठ! यह सोचकर कि अगले दिन मेरे पति की मृत्यु हो जाएगी, शोक में डूबी हुई सावित्री ने सारी रात खड़ी-खड़ी बिताई।   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.296.9 
श्वोभूते भर्तृमरणे सावित्र्या भरतर्षभ।
दु:खान्वितायास्तिष्ठन्त्या: सा रात्रिर्व्यत्यवर्तत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यह सोचकर कि अगले दिन मेरे पति की मृत्यु हो जाएगी, शोक में डूबी हुई सावित्री ने सारी रात खड़ी-खड़ी बिताई।
 
O best of the Bharatas! Thinking that her husband would die the next day, Savitri, drowned in grief, spent the night standing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)