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mahabharat 3.296.30: बड़ी-बड़ी आँखों वाली सावित्री चारों दिशाओं में घूमती रही और उसने मोरों के झुंडों से भरे सुन्दर और विचित्र वनों को देखा।   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.296.30 
सा वनानि विचित्राणि रमणीयानि सर्वश:।
मयूरगणजुष्टानि ददर्श विपुलेक्षणा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
बड़ी-बड़ी आँखों वाली सावित्री चारों दिशाओं में घूमती रही और उसने मोरों के झुंडों से भरे सुन्दर और विचित्र वनों को देखा।
 
Savitri with large eyes roamed around in all directions and saw the beautiful and strange forests served by flocks of peacocks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)