Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.296.29: मार्कण्डेय कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार सास-ससुर की अनुमति पाकर, यशस्वी सावित्री अपने पति के साथ चली गयी। यद्यपि वह बाहर से मुस्कुराती हुई प्रतीत हो रही थी, किन्तु उसका हृदय शोक की ज्वाला में जल रहा था। | mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान्के साथ उसका वनमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार सास-ससुर की अनुमति पाकर, यशस्वी सावित्री अपने पति के साथ चली गयी। यद्यपि वह बाहर से मुस्कुराती हुई प्रतीत हो रही थी, किन्तु उसका हृदय शोक की ज्वाला में जल रहा था।
Mārkaṇḍeya says - Yudhishthir! Thus, after receiving the permission of both mother-in-law and father-in-law, glorious Savitri left with her husband. Though she appeared to be smiling from the outside, her heart was burning in the flames of sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥