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श्लोक  3.296.28 
तदेषा लभतां कामं यथाभिलषितं वधू:।
अप्रमादश्च कर्तव्य: पुत्रि सत्यवत: पथि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः मेरी पुत्रवधू आज अपना अभीष्ट प्राप्त करे। पुत्री! जाओ, सत्यवान् के मार्ग पर सावधान रहो। 28।
 
Therefore, may my daughter-in-law achieve her desired goal today. Daughter! Go, be careful on the path of Satyavan. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)