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श्लोक  3.296.27 
द्युमत्सेन उवाच
यत: प्रभृति सावित्री पित्रा दत्ता स्नुषा मम।
नानयाभ्यर्थनायुक्तमुक्तपूर्वं स्मराम्यहम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
द्युमत्सेन ने कहा - मुझे याद नहीं आता कि सावित्री ने मुझसे कभी कुछ मांगा हो, क्योंकि उसके पिता ने उसे अपनी पुत्रवधू के रूप में मुझे दे दिया था।
 
Dyumatsena said - I do not remember Savitri ever asking me for anything since her father gave her to me as his daughter-in-law.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)