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सत्यवानुवाच
यदि ते गमनोत्साह: करिष्यामि तव प्रियम्।
मम त्वामन्त्रय गुरून्न मां दोष: स्पृशेदयम्॥ २२॥
अनुवाद
सत्यवान ने कहा, "यदि तुम जाने के लिए उत्सुक हो तो मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। लेकिन तुम मेरे माता-पिता से पूछ लो ताकि मुझे दोष न सहना पड़े।"
Satyavan said- If you are enthusiastic about going then I will fulfill your wish. But you should ask my parents so that I do not have to bear the blame.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥