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mahabharat 3.296.22: सत्यवान ने कहा, "यदि तुम जाने के लिए उत्सुक हो तो मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। लेकिन तुम मेरे माता-पिता से पूछ लो ताकि मुझे दोष न सहना पड़े।"   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.296.22 
सत्यवानुवाच
यदि ते गमनोत्साह: करिष्यामि तव प्रियम्।
मम त्वामन्त्रय गुरून्न मां दोष: स्पृशेदयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान ने कहा, "यदि तुम जाने के लिए उत्सुक हो तो मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। लेकिन तुम मेरे माता-पिता से पूछ लो ताकि मुझे दोष न सहना पड़े।"
 
Satyavan said- If you are enthusiastic about going then I will fulfill your wish. But you should ask my parents so that I do not have to bear the blame.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)