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mahabharat 3.296.20: सत्यवान् ने कहा- सुन्दरी! तुम पहले कभी वन में नहीं गई। वन का मार्ग अत्यन्त कठिन है, व्रत और संयम के कारण तुम दुर्बल होती जा रही हो। इस अवस्था में तुम कैसे चल सकोगी?॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.296.20 
सत्यवानुवाच
वनं न गतपूर्वं ते दु:ख: पन्थाश्च भाविनि।
व्रतोपवासक्षामा च कथं पद्भॺां गमिष्यसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान् ने कहा- सुन्दरी! तुम पहले कभी वन में नहीं गई। वन का मार्ग अत्यन्त कठिन है, व्रत और संयम के कारण तुम दुर्बल होती जा रही हो। इस अवस्था में तुम कैसे चल सकोगी?॥ 20॥
 
Satyavan said— Beautiful girl! You have never been to the forest before. The path to the forest is very difficult, you are becoming weak due to fasting and abstinence. How will you be able to walk in this condition?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)