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mahabharat 3.296.2: सावित्री दिन गिनती रही, नारदजी ने जो कहा था, वह उसके हृदय में सदैव विद्यमान रहा॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.296.2 
गणयन्त्याश्च सावित्र्या दिवसे दिवसे गते।
यद् वाक्यं नारदेनोक्तं वर्तते हृदि नित्यश:॥ २॥
 
 
अनुवाद
सावित्री दिन गिनती रही, नारदजी ने जो कहा था, वह उसके हृदय में सदैव विद्यमान रहा॥ 2॥
 
Savitri kept counting the days as they passed. What Naradji had said was always present in her heart.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)