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mahabharat 3.296.14: तब अपने पति की मृत्यु से संबंधित समय और शुभ घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए राजकुमारी सावित्री नारदजी के पूर्वोक्त वचनों को सोचकर अत्यंत दुःखी हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 3.296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 296: सावित्रीकी व्रतचर्या तथा सास-ससुर और पतिकी आज्ञा लेकर सत्यवान‍्के साथ उसका वनमें जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.296.14 
तं कालं तं मुहूर्तं च प्रतीक्षन्ती नृपात्मजा।
यथोक्तं नारदवचश्चिन्तयन्ती सुदु:खिता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब अपने पति की मृत्यु से संबंधित समय और शुभ घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए राजकुमारी सावित्री नारदजी के पूर्वोक्त वचनों को सोचकर अत्यंत दुःखी हो गईं।
 
Then while waiting for the time and auspicious moment related to the death of her husband, Princess Savitri became very sad thinking about the aforesaid words of Naradaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)