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mahabharat 3.295.8: अश्वपति बोले - धर्मात्मा राजा! मेरी यह सुन्दरी कन्या सावित्री नाम से विख्यात है। आप इसे धर्मपूर्वक अपनी पुत्रवधू स्वीकार करें। 8॥   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.295.8 
अश्वपतिरुवाच
सावित्री नाम राजर्षे कन्येयं मम शोभना।
तां स्वधर्मेण धर्मज्ञ स्नुषार्थे त्वं गृहाण मे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अश्वपति बोले - धर्मात्मा राजा! मेरी यह सुन्दरी कन्या सावित्री नाम से विख्यात है। आप इसे धर्मपूर्वक अपनी पुत्रवधू स्वीकार करें। 8॥
 
Ashvapati said – Religious king! This beautiful daughter of mine is famous by the name Savitri. You should accept her religiously to become your daughter-in-law. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)