Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.295.5-6: राजा अश्वपति ने राजा द्युमत्सेन का आदरपूर्वक पूजन किया और वाणी को संयमित करते हुए उन्हें अपना परिचय दिया। तब बुद्धिमान राजा द्युमत्सेन ने मद्रराज अश्वपति को स्तुति, आसन और गौ भेंट करके पूछा - 'आप यहाँ किस उद्देश्य से आये हैं?'॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राजा तस्य राजर्षे: कृत्वा पूजां यथार्हत:।
वाचा सुनियतो भूत्वा चकारात्मनिवेदनम्॥ ५॥
तस्यार्घ्यमासनं चैव गां चावेद्य स धर्मवित्।
किमागमनमित्येवं राजा राजानमब्रवीत्॥ ६॥
अनुवाद
राजा अश्वपति ने राजा द्युमत्सेन का आदरपूर्वक पूजन किया और वाणी को संयमित करते हुए उन्हें अपना परिचय दिया। तब बुद्धिमान राजा द्युमत्सेन ने मद्रराज अश्वपति को स्तुति, आसन और गौ भेंट करके पूछा - 'आप यहाँ किस उद्देश्य से आये हैं?'॥5-6॥
King Ashwapati worshipped King Dyumatsena with due respect and introduced himself to him while controlling his speech. Then the wise king Dyumatsena offered prayers, a seat and a cow to the Madra king Ashwapati and asked him, 'For what purpose have you come here?'॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥