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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.295.4 
तत्रापश्यन्महाभागं शालवृक्षमुपाश्रितम्।
कौश्यां बृस्यां समासीनं चक्षुर्हीनं नृपं तदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने भाग्यशाली अंधे राजा को शाल वृक्ष के नीचे कुशा की चटाई पर बैठे देखा।
 
There he saw the fortunate blind king sitting on a kusha mat under a sal tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)