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mahabharat 3.295.22: भरतनन्दन! इस प्रकार उन सब लोगों ने उस आश्रम में तपस्या करते हुए कुछ समय व्यतीत किया॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.295.22 
एवं तत्राश्रमे तेषां तदा निवसतां सताम्।
कालस्तपस्यतां कश्चिदपाक्रामत भारत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! इस प्रकार उन सब लोगों ने उस आश्रम में तपस्या करते हुए कुछ समय व्यतीत किया॥22॥
 
Bharatanandan! In this way all those people spent some time doing penance in that ashram. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)