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mahabharat 3.295.21: इसी प्रकार मधुर वाणी, कार्यकुशलता, शांति और एकान्त सेवा के द्वारा वह अपने पति को सदैव प्रसन्न रखती थी ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.295.21 
तथैव प्रियवादेन नैपुणेन शमेन च।
रहश्चैवोपचारेण भर्तारं पर्यतोषयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार मधुर वाणी, कार्यकुशलता, शांति और एकान्त सेवा के द्वारा वह अपने पति को सदैव प्रसन्न रखती थी ॥21॥
 
Similarly, she always kept her husband happy through sweet speech, efficiency in work, peace and solitary service. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)