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mahabharat 3.295.20: उन्होंने अपनी सास को शारीरिक सेवा, वस्त्र और आभूषणों से तथा अपने ससुर को दिव्य आतिथ्य और वाणी पर संयम रखकर संतुष्ट किया।   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.295.20 
श्वश्रूं शरीरसत्कारै: सर्वैराच्छादनादिभि:।
श्वशुरं देवसत्कारैर्वाच: संयमनेन च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपनी सास को शारीरिक सेवा, वस्त्र और आभूषणों से तथा अपने ससुर को दिव्य आतिथ्य और वाणी पर संयम रखकर संतुष्ट किया।
 
He satisfied his mother-in-law with physical service and with clothes and ornaments, and his father-in-law with divine hospitality and with restraint in speech.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)