श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.295.19 
परिचारैर्गुणैश्चैव प्रश्रयेण दमेन च।
सर्वकामक्रियाभिश्च सर्वेषां तुष्टिमादधे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सावित्री ने अपनी सेवा, सदाचार, विनय, संयम और सबकी इच्छानुसार कार्य करके सबको प्रसन्न किया॥19॥
 
Savitri pleased everybody by her service, virtue, humility, self-restraint and by doing things according to everybody's wishes.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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