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mahabharat 3.295.18: पिता के चले जाने पर सावित्री ने अपने सब आभूषण उतार दिए और छाल और गेरुआ वस्त्र धारण करने लगी॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.295.18 
गते पितरि सर्वाणि संन्यस्याभरणानि सा।
जगृहे वल्कलान्येव वस्त्रं काषायमेव च॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पिता के चले जाने पर सावित्री ने अपने सब आभूषण उतार दिए और छाल और गेरुआ वस्त्र धारण करने लगी॥18॥
 
After her father left, Savitri took off all her ornaments and started wearing bark and saffron clothes.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)