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mahabharat 3.295.16: राजा अश्वपति कन्या को दहेज सहित देकर बड़े हर्ष के साथ अपनी राजधानी को लौट आये ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.295.16 
दत्त्वा सोऽश्वपति: कन्यां यथार्हं सपरिच्छदम्।
ययौ स्वमेव भवनं युक्त: परमया मुदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजा अश्वपति कन्या को दहेज सहित देकर बड़े हर्ष के साथ अपनी राजधानी को लौट आये ॥16॥
 
King Ashwapati returned to his capital with great joy after giving the bride along with her dowry. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)