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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 295: सत्यवान‍् और सावित्रीका विवाह तथा सावित्रीका अपनी सेवाओंद्वारा सबको संतुष्ट करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.295.11 
आशां नार्हसि मे हन्तुं सौहृदात् प्रणतस्य च।
अभितश्चागतं प्रेम्णा प्रत्याख्यातुं न मार्हसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैं आपके पास मित्रतापूर्वक आया हूँ। कृपया मुझे निराश न करें। मैं, जो आपके पास प्रेमपूर्वक आया हूँ, आपको निराश न करूँ।
 
I have come to you in a friendly manner. Please do not disappoint me. I, who have come to you with love, do not turn you away disappointed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)