श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.294.5 
अश्वपतिरुवाच
कार्येण खल्वनेनैव प्रेषिताद्यैव चागता।
एतस्या: शृणु देवर्षे भर्तारं योऽनया वृत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अश्वपति बोले - देवर्षि! मैंने उसे इसी उद्देश्य से भेजा था और वह अभी-अभी लौट आई है। उसने जिस पति का वरण किया है, उसका नाम उसके मुख से सुनिए ॥5॥
 
Ashwapati said - Devarshi! I had sent her for this very purpose and she has just returned. Listen to the name of the husband she has chosen from her own mouth. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)