मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर नारदजी उठकर स्वर्ग चले गए। इधर राजा भी अपनी पुत्री के विवाह की तैयारी करने लगे। 33.
Markandeyji says- Yudhishthira! Saying this, Naradji got up and went to heaven. Here the king also started preparing for his daughter's marriage. 33.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि पतिव्रतामाहात्म्यपर्वणि सावित्र्युपाख्याने चतुर्नवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत पतिव्रतामाहात्म्यपर्वमें सावित्री-उपाख्यानविषयक दो सौ चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)