श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.294.32 
नारद उवाच
अविघ्नमस्तु सावित्र्या: प्रदाने दुहितुस्तव।
साधयिष्याम्यहं तावत् सर्वेषां भद्रमस्तु व:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले, "हे राजन! आपकी पुत्री सावित्री के विवाह में कोई विघ्न न आए। अच्छा, अब मैं जाता हूँ। आप सबका कल्याण हो।"
 
Naradji said- O King! May there be no hindrance in the marriage of your daughter Savitri. Well, I am leaving now. May you all be blessed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)