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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.294.31 
राजोवाच
अविचाल्यं तदुक्तं यत् तथ्यं भगवता वच:।
करिष्याम्येतदेवं च गुरुर्हि भगवान् मम॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा - देवर्षि! आपने जो कहा है, वह सत्य है। इसे टाला नहीं जा सकता। अतः मैं भी ऐसा ही करूँगा, क्योंकि आप मेरे गुरु हैं।
 
The king said - Devarshi! What you have said is correct. It cannot be avoided. So I will do the same because you are my Guru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)