श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.294.28 
मनसा निश्चयं कृत्वा ततो वाचाभिधीयते।
क्रियते कर्मणा पश्चात् प्रमाणं मे मनस्तत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पहले मन में निश्चय किया जाता है, फिर वाणी द्वारा कहा जाता है। तत्पश्चात् उसे कार्यरूप में परिणत किया जाता है, अतः इस विषय में मेरा मन ही प्रमाण है॥28॥
 
First it is decided in the mind and then it is said through words. After that it is put into action, hence in this matter my mind itself is the proof.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)