श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.294.24 
राजोवाच
एहि सावित्रि गच्छस्व अन्यं वरय शोभने।
तस्य दोषो महानेको गुणानाक्रम्य च स्थित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "सावित्री! पुत्री! इधर आओ। सुन्दरी! तुम पुनः यात्रा करके किसी दूसरे पुरुष का वरण करो। सत्यवान् में यही एक बड़ा दोष है, जो उसके समस्त गुणों पर छाया कर रहा है॥ 24॥
 
The king said, "Savitri, daughter! Come here. Beautiful! You should travel again and choose some other man. Satyavan has this one big flaw which is overshadowing all his good qualities.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)