श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.294.23 
एको दोषोऽस्ति नान्योऽस्य सोऽद्यप्रभृति सत्यवान‍्।
संवत्सरेण क्षीणायुर्देहन्यासं करिष्यति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
आज से एक वर्ष पूर्ण होने तक सत्यवान् की आयु पूरी हो जाएगी और वह शरीर त्याग देगा। उसमें केवल यही दोष है, और कुछ नहीं॥23॥
 
From today till the completion of one year, Satyavan's age will be over and he will give up his body. This is the only fault in him, nothing else.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)