Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.294.22: नारद बोले, "केवल एक ही दोष है जो अपने सभी गुणों को दबाकर उपस्थित है। वह दोष प्रयत्न करने पर भी दूर नहीं किया जा सकता।"   |   mahabharat अध्याय 3.294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.294.22 
नारद उवाच
एक एवास्य दोषो हि गुणानाक्रम्य तिष्ठति।
स च दोष: प्रयत्नेन न शक्यमतिवर्तितुम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, "केवल एक ही दोष है जो अपने सभी गुणों को दबाकर उपस्थित है। वह दोष प्रयत्न करने पर भी दूर नहीं किया जा सकता।"
 
Narada said, "There is only one flaw which is present by suppressing all its qualities. That flaw cannot be removed even by trying."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)