श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.294.18 
ययातिरिव चोदार: सोमवत् प्रियदर्शन:।
रूपेणान्यतमोऽश्विभ्यां द्युमत्सेनसुतो बली॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह ययातिकि के समान दानशील और चन्द्रमा के समान प्रेममय है। द्युमत्सेन का वह बलवान पुत्र इतना सुन्दर है मानो वह अश्विनीकुमारों में से कोई हो ॥18॥
 
He is as generous as Yayatiki and as loving as the moon. That strong son of Dyumatsen is so handsome as if he is one of the Ashvinikumars. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)