श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.294.17 
नारद उवाच
सांकृते रन्तिदेवस्य स्वशक्त्या दानत: सम:।
ब्रह्मण्य: सत्यवादी च शिबिरौशीनरो यथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
नारदजी ने कहा-सत्यवान अपनी शक्ति के अनुसार दान देने में संक्रांतिनन्दन रंतिदेव के समान हैं तथा उशीनर पुत्र शिबि के समान ब्राह्मण भक्त तथा सत्यवादी हैं। 17॥
 
Naradji said - Satyavan is like Sankrantinandan Rantidev in giving donations according to his power and is a Brahmin devotee and truthful like Ushinar's son Shibi. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)