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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय
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श्लोक 16
श्लोक
3.294.16
अश्वपतिरुवाच
अपि राजात्मजो दाता ब्रह्मण्यश्चापि सत्यवान्।
रूपवानप्युदारो वाप्यथवा प्रियदर्शन:॥ १६॥
अनुवाद
अश्वपति ने पूछा - क्या राजा का पुत्र सत्यवादी दानी, ब्राह्मण भक्त, सुन्दर, उदार अथवा प्रिय व्यक्ति भी है?
Ashvapati asked - Is the king's son a truthful donor, a Brahmin devotee, handsome, generous or even a beloved person?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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