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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.294.15 
नारद उवाच
विवस्वानिव तेजस्वी बृहस्पतिसमो मतौ।
महेन्द्र इव वीरश्च वसुधेव समन्वित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, "वह राजकुमार सूर्य के समान तेजस्वी, बृहस्पति के समान बुद्धिमान, इन्द्र के समान पराक्रमी तथा पृथ्वी के समान क्षमाशील है।"
 
Narada said, "That prince is as radiant as the Sun, as intelligent as Jupiter, as valiant as Indra and as forgiving as the Earth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)