श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.294.14 
राजोवाच
अपीदानीं स तेजस्वी बुद्धिमान् वा नृपात्मज:।
क्षमावानपि वा शूर: सत्यवान‍् पितृवत्सल:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा ने पूछा - हे प्रिये! इस समय तो भक्त राजकुमार सत्यवान् तेजस्वी, बुद्धिमान, क्षमाशील और वीर हैं न?
 
The king asked – My dear! At this time, the devoted prince Satyavan is brilliant, intelligent, forgiving and brave, isn't he? 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)