श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.294.13 
बालस्याश्वा: प्रियाश्चास्य करोत्यश्वांश्च मृन्मयान्।
चित्रेऽपि विलिखत्यश्वांश्चित्राश्व इति चोच्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस बालक को घोड़ों का बहुत शौक है। वह मिट्टी से घोड़े बनाता है और चित्र बनाते समय भी हमेशा घोड़े ही बनाता है। इसलिए उसे 'चित्राश्व' भी कहते हैं।
 
This boy is very fond of horses. He makes horses out of clay and even while painting he always draws horses. Hence he is also called 'Chitraashva'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)