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mahabharat 3.294.11: (यह सुनकर) नारद जी बोले- हे! यह बड़े खेद की बात है। हे राजन! सावित्री ने अनजाने में ही सत्यवान को गुणवान जानकर उसका वरण करके अपना बहुत बड़ा अनिष्ट किया है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.294.11 
नारद उवाच
अहो बत महत् पापं सावित्र्या नृपते कृतम्।
अजानन्त्या यदनया गुणवान् सत्यवान‍् वृत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
(यह सुनकर) नारद जी बोले- हे! यह बड़े खेद की बात है। हे राजन! सावित्री ने अनजाने में ही सत्यवान को गुणवान जानकर उसका वरण करके अपना बहुत बड़ा अनिष्ट किया है।॥11॥
 
(Hearing this) Narada ji said- Oh! This is a matter of great regret. O King! Savitri has done a great harm to herself without knowing it by choosing Satyavan considering him to be a man of virtue. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)