श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.294.1 
मार्कण्डेय उवाच
अथ मद्राधिपो राजा नारदेन समागत:।
उपविष्ट: सभामध्ये कथायोगेन भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: हे भरतपुत्र युधिष्ठिर! एक दिन मद्र देश के राजा अश्वपति अपने दरबार में बैठे हुए देवर्षि नारद से बातें कर रहे थे।
 
Mārkaṇḍeya says: O son of Bharata, Yudhishthira! One day, the king of Madra, Ashwapati, was sitting in his court and talking with the sage Devarshi Nārada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)